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क्या अपना देश दिन पर दिन गरीब होता जा रहा हैं - Know-The-World - Know-The-World

क्या अपना देश दिन पर दिन गरीब होता जा रहा हैं

By on June 10, 2013

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क्या  अपना देश  दिन पर दिन गरीब होता जा रहा  हैं ?  देखिये २००९ से आज तक का सफ़र ।

प्रधानमंत्री जी कहते है क़ि अर्थवयवस्था बढ़ रही है देश आगे जा रहा है लेकिन बावजूद इसके गरीबो क़ि संख्या दिन प्रतिदिन क्यों बढ़ रही है इसका जवाब वह नहीं देते l
मैं अर्थशास्त्री तो नहीं हू चूँकि में एक गरीब आदमी हू तो उनकी कही बाते मेरे सर के ऊपर से निकल जाती है l मुझे सिर्फ इतना पता है क़ि मेरी तनख्वाह कुछ साल पहले जितनी थी आज भी कमोबेश उतनी ही है लेकिन कुछ साल पहले मैं जिस दाम पर पेट्रोल खरीदता था आज मुझे उसके दोगुने दाम चुकाने पड़ते है l एक आम आदमी क़ि कमाई में जितनी बढ़ोतरी हुई है उस से कई गुना अधिक महंगाई बढ़ी है नतीजा यह है क़ि लोगो ने अपने रोज़मर्रा के खर्च के अलावा खाने पीने में भी कटोती कर दी है l यदि इसी को विकासदर और जीडीपी आदि जो भी कुछ होता है का बढ़ना कहा जाता है तो धन्य है मनमोहन सरकार के उसने कुछ ही समय में इतनी तरक्की देश क़ि कर दी क़ि कल तक 20 रुपये में एक किलो चावल लाकर पेटभर खाने के बाद आराम से सोने वाला गरीब आदमी आज 20 रुपये में आधा किलो चावल लाकर बच्चो को खिला देता है और खुद भूखा रहकर रातभर जागने के बाद मनमोहन जी क़ि बताई हुई विकासदर के बारे में सोचकर मुस्कुराता है l मुस्कराता वह इसलिए है क़ि वह न तो कुछ कर सकता है और न ही कोई उसकी सुनता है l
एक गरीब आदमी जो पहले 400 रुपये में रसोई गैस खरीदकर उसे जैसे तैसे एक महीना चलाता था उसकी आय आज भी वही है लेकिन अब उसे उसी रसोई गैस के लिए करीब 800 रुपये चुकाने होंगे मनमोहन जी क़ि विकास दर वाली बात यंहा पर भी मुझे समझ नहीं आ रही है क़ि आखिर हर वस्तु के महंगा हो जाने से देश का विकास किस प्रकार संभव है l कल तक जो चीज हम 5 रुपये आज वह दस में और जल्दी ही 15 में खरीदेंगे लेकिन सरकारी नौकरी करने वालो क़ि बात छोड़िये बाकी कौन सा वर्ग है जिसकी आय महंगाई के साथ और महंगाई के अनुरूप बढ़ी है फिर आखिर कैसे वह महंगा सामान खरीद सकता है
प्रधानमंत्री जी क्षमा कीजिये आप बहुत लम्बे अरसे के बाद बोले वह ठीक है लेकिन क्या बोले यह मैं नहीं समझ पा रहा हूँ सिवाय इसके क़ि पैसे पेड़ पर नहीं लगते सही है क्योंकि सुबह से शाम तक मेहनत करने के बाद जब मुझे पैसे मिलते है तो मैं अच्छे से समझता हूँ के ये पैसे मैंने पेड़ से नहीं तोड़े है यह पैसे मैंने अपनी मेहनत से कमाए है l ये अलग बात है क़ि मेरे ये मेहनत के पैसे आपकी सरकार के किसी घोटाले क़ि भेंट चढ़कर पेड़ पर ही लग जाने वाले है …………

 

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One Comment

  1. Aaeshi

    July 8, 2013 at 10:11 pm

    वो दिन अब दूर नहीं जब $१ बराबर होगा रुपै १०० के…